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PCOS vs PCOD: दो बहनों की कहानी जो खोल देगी इन रहस्यों को

जानिए PCOD vs PCOS का असली अंतर सरल हिंदी में। कोमल और अंजू की कहानी से समझें लक्षण, कारण, घरेलू डाइट प्लान, योगासन और इलाज। भारत में 1 में से 5 महिलाओं को प्रभावित — डॉक्टर से सलाह जरूर लें।”

 

ब्लॉग तालिका

परिचय: दो बहनें, दो अलग जंगें

दिल्ली की हलचल भरी गलियों में रहने वाली अंजू और कोमल, दो जुड़वां बहनें, जिनकी जिंदगी बचपन से ही एक जैसी लगती थी। कॉलेज की पार्टियां, लेट नाइट स्टडीज, और मां के हाथों का स्पेशल आलू पराठा – सब कुछ शेयर। लेकिन 25 साल की उम्र में, दोनों की जिंदगी ने अचानक मोड़ ले लिया। अंजू को डॉक्टर ने कहा, “यह PCOS है – एक सिंड्रोम जो तुम्हारी पूरी बॉडी को प्रभावित कर रहा है।” वहीं, कोमल को डायग्नोसिस मिला, “PCOD – यह ओवरी का डिसऑर्डर है, लेकिन लाइफस्टाइल चेंजेस से कंट्रोल हो जाएगा।”

अंजू रो पड़ी, “दीदी, मुझे तो लगता था दोनों एक ही चीज है। PCOS और PCOD में क्या फर्क?” कोमल ने कंधे पर हाथ रखा, “चलो, पता लगाते हैं। शायद हमारी कहानी दूसरी लड़कियों को भी मदद करे।” इस ब्लॉग में, हम इन्हीं दो बहनों की नजर से देखेंगे PCOS vs PCOD के अंतर को। हम बात करेंगे लक्षणों की, कारणों की, उपचार की, और यहां तक कि भारत में इनकी भयावह सच्चाई के आंकड़ों की। यह सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि एक दिलचस्प सफर है – जहां हंसना, रोना, और सीखना सब एक साथ है। आइए, शुरू करते हैं उनकी कहानी से, जो PCOS और PCOD में अंतर को साफ कर देगी।

अंजू और कोमल की कहानी से pcos और pcod मे अंतर

कोमल हमेशा एक्टिव रहने वाली लड़की थी। 

कभी जिम चले जाना, 

कभी साइकिलिंग, और 

ऑफिस में घंटों काम 

– लेकिन 

पिछले दो सालों से उसके पीरियड्स अनियमित हो गए थे। कभी 40 दिन, कभी 20।

वजन बढ़ना शुरू हो गया, 

चेहरा पर एक्ने की मार, और 

बाल झड़ने लगे। 

 

“मुझे लगा, तनाव की वजह से है,” कोमल ने अंजू से शेयर किया। लेकिन अल्ट्रासाउंड में पता चला – ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट्स। 

डॉक्टर ने कहा, “यह PCOD है – Polycystic Ovarian Disease।”

 

.

अंजू की जिंदगी थोड़ी अलग थी।

कॉर्पोरेट जॉब, 

बड़े सपने , लेकिन तनाव से भरी ज़िन्दगी । 

 

उसके पीरियड्स तो अनियमित ही थे, 

लेकिन साथ में वजन तेजी से बढ़ा – 10 किलो सिर्फ छह महीनों में। 

चेहरे पर डार्क पैचेस, बाल पतले हो गए, और डॉक्टर के पास जाने पर रिपोर्ट आई:

 “PCOS – Polycystic Ovary Syndrome।”

 अंजू ने कोमल से कहा, “दीदी, मुझे लगता है मैं कभी मां नहीं बन पाऊंगी।”

 

PCOD क्या है?

PCOS क्या है?

सरल शब्दों में, PCOD एक हार्मोनल इम्बैलेंस है जो ओवरी को प्रभावित करता है। 

ओवरी में फॉलिकल्स (अंडे के थैले) सही से मैच्योर नहीं होते, जिससे छोटे सिस्ट्स बन जाते हैं। 

यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक कंडीशन है जो 70-80% मामलों में लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है।30223a 

कोमल की तरह, लाखों महिलाओं को यह होता है क्योंकि हमारी फास्ट लाइफ – जंक फूड, कम नींद, स्ट्रेस – हार्मोन्स को बिगाड़ देती है।

PCOD से अलग, PCOS एक पूर्ण एंडोक्राइन डिसऑर्डर है। यह सिर्फ ओवरी नहीं, बल्कि पूरे बॉडी को प्रभावित करता है – 

इंसुलिन रेसिस्टेंस, 

हाई एंड्रोजन लेवल, और 

क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन। 

ओवरी में सिस्ट्स तो बनते हैं, लेकिन समस्या गहरी है: हार्मोन्स का असंतुलन जो मेटाबॉलिज्म बिगाड़ देता है। अंजू की तरह, PCOS वाली महिलाओं में इन्फर्टिलिटी रेट 70-80% तक होता है।

PCOD के लक्षण (जो कोमल ने महसूस किए):

PCOS के लक्षण (अंजू के अनुभव से):

अनियमित मासिक धर्म: पीरियड्स लेट आना या स्किप हो जाना।

वजन बढ़ना: खासकर पेट के आसपास।

एक्ने और ऑयली स्किन: हार्मोन्स के कारण।

हल्का हिर्सुटिज्म: चेहरे या बॉडी पर अनचाहे बाल।

थकान और मूड स्विंग्स।

इन्फेर्टिलिटी की संभावना 30 % 

कोमल ने डायरी में लिखा, “एक दिन जिम गई, तो लगा जैसे पहाड़ चढ़ रही हूं। लेकिन डॉक्टर ने कहा, यह PCOD की वजह से एनर्जी लेवल कम है।

” ट्रेंडिंग सर्च “PCOS symptoms” में PCOD के लक्षण भी आते हैं, लेकिन PCOD में ये हल्के होते हैं और ज्यादातर महिलाओं में प्रेग्नेंसी की समस्या नहीं होती।

PCOD जैसे लक्षण, लेकिन इंटेंस: 

भारी अनियमित पीरियड्स, जो महीनों स्किप हो सकते हैं।

वजन गेन और इंसुलिन रेसिस्टेंस: पेट पर फैट जमा।

हिर्सुटिज्म और मुहासे : ज्यादा प्रोनाउंस्ड।

बालो का झड़ना और त्वचा का रंग उड़ना (अकांथोसिस निग्रिकन्स)।

मेटाबॉलिक इश्यूज: थकान, डिप्रेशन, और यहां तक कि स्लीप एप्निया।

इन्फेर्टिलिटी की संभावना 75 % 

 

अंजू ने शेयर किया, “रात को नींद नहीं आती, दिन में थकान। और वो डार्क पैचेस – आईने में देखना मुश्किल हो गया।” 

ट्रेंडिंग “PCOS symptoms in Hindi” में यही सर्चेस आती हैं – “पीसीओएस के लक्षण क्या हैं?” – क्योंकि 40% महिलाएं इन्हें इग्नोर कर देती हैं।

 

इन्सुलिन रेजिस्टेंस का विज्ञान जो की pcod का कारण होता है pcos का कारण होता है

 

बहुत ज्यादा जंक फूड खाती हो और और व्यायाम ना के बराबर करती हो तो आपके शरीर मे 

ग्लूकोस (शरकरा) बढ़ता है 

^

इसको तोड़ने के लिए शरीर ज्यादा इन्सुलिन होर्मोन बनता है 

ज्यादा इन्सुलिन बनाने के कारण शरीर इसकी बात सुनना बंद कर देता है जिसे इन्सुलिन रेजिस्टेंस कहते है 

इसके साथ इस शरकरा को तोड़ने के लिए ओवरी पुरुष होर्मोन टेस्टेस्टरोन निकलती है जो की इसे तोड़ने मे मदद करता है 

नतीजन आपके शरीर मे होर्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है और आप के शरीर मे pcos का शिकार हो जाता है 

PCOD के कारण:

PCOS के कारण:

जेनेटिक्स का बहुत कम रोल होता है, 

लेकिन मुख्य वजहें लाइफस्टाइल हैं – 

हाई कार्ब डाइट, 

कम एक्सरसाइज, और 

इंसुलिन लेवल में उतार-चढ़ाव। 

 

भारत में, जहां 60% महिलाएं सेडेंटरी लाइफ जीती हैं, PCOD तेजी से फैल रहा है। कोमल ने कन्फेस किया, “मैं रोटी-दाल भूलकर पिज्जा और चिप्स की फैन हो गई थी। यही तो समस्या थी!”

 

जेनेटिक्स मजबूत रोल प्ले करता है (मां-बेटी में 50% चांस)।

 लेकिन मुख्य ट्रिगर्स:

इंसुलिन रेसिस्टेंस (80% PCOS केस में),

क्रॉनिक लो-ग्रेड इन्फ्लेमेशन, और पर्यावरणीय फैक्टर्स जैसे पॉल्यूशन। भारत में, जहां डायबिटीज रेट हाई है, PCOS तेजी से बढ़ रहा। अंजू ने कहा, “मेरी फैमिली में डायबिटीज है, शायद यही वजह।”

PCOD का उपचार: कोमल का सफर

PCOS का उपचार: अंजू की उम्मीद की किरण

डॉक्टर ने कोमल को सलाह दी –

 कोई जादुई दवाई नहीं, लेकिन दिनचर्या बदलाव से 90% सुधार। 

पहला स्टेप: सही खानपान (diet) ।

 “सुबह ओट्स, 

दोपहर पनीर, दाल हाई प्रोटीन 

 रात में हल्का खाना ,” कोमल ने ट्राई किया।

एक्सरसाइज – रोज 30 मिनट जिम मे मेहनत । 

मेडिसिन में दूरी, योग अभ्यास और विटामिन डी सप्लीमेंट। 

तीन महीने में उसके पीरियड्स रेगुलर हो गए। “अब लगता है, PCOD कोई दुश्मन नहीं, बस एक सिग्नल है बॉडी का!”

 

अंजू का ट्रीटमेंट कॉम्प्लेक्स था।

पहले, मेटफॉर्मिन – इंसुलिन सेंसिटिविटी के लिए। 

फिर, होर्मोनल पिल्स मासिक धर्म रेगुलेट करने के लिए। 

लेकिन असली गेम-चेंजर: लाइफस्टाइल।

 “डॉक्टर ने अंजू को कहा, “ अगर 5-10% वेट लॉस भी किया जाये तो 50% लक्षण कम हो जाएंगे,” 

 अंजू नें योगा क्लास जॉइन की, 

लो-कार्ब डाइट अपनाई – ब्राउन राइस, ग्रीन वेज, और नट्स।

 योग अभ्यास को जीवन बनाया।

लघु तुलनात्मक अध्ययन

बीमारी 

परिभाषा

प्रिवेलेंस

गंभीरता

लक्षण

कारण

उपचार

प्रभाव

PCOD (कोमल जैसा)

‎ओवरी डिसऑर्डर, हार्मोनल इम्बैलेंस।

‎10-20% महिलाओं में।

‎हल्का, रिवर्सिबल।

‎अनियमित पीरियड्स, वेट गेन, एक्ने।

‎लाइफस्टाइल (डाइट, स्ट्रेस)।

‎डाइट + एक्सरसाइज, 90% सफलता।

‎मुख्यतः रिप्रोडक्टिव।

 PCOS (अंजू जैसा)

पूर्ण सिंड्रोम, एंडोक्राइन डिसऑर्डर।

‎भारत में 20% (1 in 5 महिलाएं)।

‎गंभीर, लॉन्ग-टर्म रिस्क्स (डायबिटीज 50% चांस)।

‎ऊपर के अलावा हेयर लॉस, डिप्रेशन, इन्फर्टिलिटी (70%)।

‎जेनेटिक्स + इंसुलिन रेसिस्टेंस।

‎मेड्स + लाइफस्टाइल, IVF अगर जरूरी।

‎मेटाबॉलिक, हार्ट, मेंटल हेल्थ।

Pcos और pcod के कॉमन लक्षण

अनियमित मासिक धर्म : 50% महिलाओं में।

वजन समस्याएं: PCOS में 60% महिलाओ मे मोटापा और वजन बढ़ना।

मुहासे और चेहरे के बाल : एक्ने 30%, हिर्सुटिज्म 70%।

बाँझपन : PCOD में 30%, PCOS में 75%।

PCOS और PCOD के लिए व्यायाम

1) स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ( जिम व्यायाम )

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

​मांसपेशियों का निर्माण: यह शरीर में मांसपेशियों (Lean Muscle) को बढ़ाती है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और आराम करते समय भी शरीर अधिक कैलोरी बर्न करता है。

​इंसुलिन संवेदनशीलता: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों को रक्त से ग्लूकोज सोखने में मदद करती है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य है।

​हार्मोनल संतुलन: नियमित वेट ट्रेनिंग से टेस्टोस्टेरोन जैसे पुरुष हार्मोन के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे चेहरे पर बाल और मुहांसों की समस्या में सुधार होता है।

​हड्डियों की मजबूती: हार्मोनल गड़बड़ी के कारण महिलाओं में हड्डियों की डेंसिटी कम होने का खतरा रहता है, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हड्डियों को मजबूत बनाती है।

​आत्मविश्वास में बढ़ोतरी: शारीरिक शक्ति बढ़ने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और शरीर की छवि (Body Image) को लेकर सकारात्मकता आती है।

2) तितली आसन (Butterfly Pose)

PCOS के लिए तितली आसन (Butterfly Pose)
PCOS के लिए तितली आसन (Butterfly Pose)

तितली आसन (Butterfly Pose) के लाभ

​यह आसन PCOD/PCOS के प्रबंधन में सबसे अधिक लाभदायक माना जाता है क्योंकि यह विशेष रूप से प्रजनन अंगों पर काम करता है।

​रक्त संचार (Blood Circulation): यह आसन गर्भाशय और अंडाशय (Ovaries) के आसपास रक्त के संचार को बढ़ाता है, जिससे हार्मोनल संतुलन में मदद मिलती है।

​तनाव कम करना: यह कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को खोलता है, जो शरीर में दबे हुए तनाव (Stress) को कम करने में सहायक है।

​प्रजनन अंगों की कार्यक्षमता: इसके नियमित अभ्यास से अंडाशय की कार्यप्रणाली में सुधार होता है, जो PCOD जैसी स्थिति में अंडों को सही समय पर रिलीज करने में मदद कर सकता है।

3) सेतुबंधासन (Bridge Pose)

PCOS के लिए सेतुबंधासन आसन (Bridge Pose)

सेतुबंधासन (Bridge Pose) के लाभ

यह आसन न केवल शरीर को मजबूती देता है, बल्कि अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine system) को भी विनियमित करता है।

​इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity): सेतुबंधासन पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद कर सकता है—यह PCOS के प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

​हार्मोनल संतुलन: यह आसन थायरॉयड और पिट्यूटरी ग्रंथियों को सक्रिय करता है, जो शरीर के समग्र हार्मोनल स्वास्थ्य को नियंत्रित करती हैं।

​पेल्विक स्वास्थ्य: यह पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों को खींचता और मजबूत बनाता है, जिससे पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में राहत मिलती है।

​चिंता और अवसाद में राहत: सेतुबंधासन मस्तिष्क को शांत करता है और PCOS के कारण होने वाली एंग्जायटी को कम करने में प्रभावी है।

4) जोगिंग ( हल्की दौड़ )

जॉगिंग करना कोमल और अंजू जैसी महिलाओं के लिए एक बेहतरीन कार्डियो एक्सरसाइज है, जो PCOS और PCOD के लक्षणों को कम करने में जादुई भूमिका निभा सकती है।

​जॉगिंग करने के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

​इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार: नियमित जॉगिंग शरीर की इंसुलिन का उपयोग करने की क्षमता को बढ़ाती है, जो PCOS को रिवर्स करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

​वजन नियंत्रण: यह कैलोरी बर्न करने और मेटाबॉलिज्म को तेज करने का एक प्रभावी तरीका है, जिससे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।

​हार्मोनल संतुलन: शारीरिक गतिविधि से शरीर में ‘एंडोर्फिन’ (हार्मोन) रिलीज होते हैं, जो तनाव को कम करते हैं और हार्मोन के बिगड़े हुए स्तर को संतुलित करने में सहायक होते हैं।

​मानसिक स्वास्थ्य: जॉगिंग करने से एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों में कमी आती है, जो अक्सर हार्मोनल असंतुलन के कारण देखे जाते हैं।

​हृदय स्वास्थ्य: यह रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित रखने और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद करती है।

Pcos और pcod के लिए डाइट

Vegetables सब्जियाँ

ब्रोकली, पालक, टमाटर, गाजर (रोज 4-5 सर्विंग्स – फाइबर इंसुलिन कंट्रोल करता है)।

Fruits फल 

बेरीज, सेब, नाशपाती (1-2 रोज – एंटीऑक्सीडेंट्स हार्मोन्स बैलेंस करते हैं)।

Protein प्रोटीन  

: चिकन ब्रेस्ट, मछली (सैल्मन),

यदि शाकाहारी हो तो दालें, अंडे (लीन प्रोटीन – मसल्स बिल्ड करता है और चर्बी घटाने मे मदद करता है 

Healthy fats (स्वस्थ वसा )

एवोकाडो, नट्स (बादाम 10-15), ऑलिव ऑयल (हार्ट हेल्थ के लिए)।.

Grains (अनाज) 

ओट्स, क्विनोआ, ब्राउन राइस (लो-कार्ब – ब्लड शुगर स्टेबल रखते हैं)।

Drinks ( पेय पदार्थ )

: ग्रीन टी, स्पीर्मिंट टी (रोज 2 कप – एंड्रोजन कम करती है)।

PCOS और PCOD मे क्या ना खाये

शुगर: सोडा, मिठाई, व्हाइट ब्रेड।

‎प्रोसेस्ड फूडः चिप्स, फ्राइड आइटम्स।

‎हाई-कार्ब: व्हाइट राइस, पास्ता।

PCOS और PCOD के लिए डाइट सैंपल

Breakfast (नाश्ता )

: ओट्स का दलिया  बादाम के साथ (फाइबर से भरा, 300 कैलोरी)।

‎मिड-मॉर्निंग स्नैकः

ग्रीक योगर्ट विद एप्पल (प्रोटीन बूस्ट, करता है ।

‎Lunch (लंच)

ग्रिल्ड चिकन या पनीर सलाद  क्विनोआ के साथ और सब्जिया (बैलेंस्ड, 400 कैलोरी)।

‎Evening snacks ( श्याम मे )

स्पीर्मिंट टी विद लेमन (150 कैलोरी)।या ड्राई फ्रूट।

‎Dinner (रात का खाना )

सब्जिया और ब्राउन राइस खाना हल्का रखे।

Pcos and pcod FAQ

  • PCOS के मुख्य लक्षण अनियमित मासिक धर्म (50% महिलाओं में), तेजी से वजन बढ़ना (पेट पर चर्बी , 60% केस मे), मुंहासे और अनचाहे बाल (हिर्सुटिज्म, 70%), हेयर लॉस, और डिप्रेशन हैं। अंजू को डार्क स्किन पैचेस और थकान हुई, जो इंसुलिन रेसिस्टेंस से जुड़े थे। अगर 3+ लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं – अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट से कन्फर्म होता है।
  • PCOD (Polycystic Ovarian Disease) ओवरी (अंडाश्य) में छोटे सिस्ट्स बनने से होता है, जिसका कारण शरीर मे हार्मोनल असंतुलन (एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन) होता है। मुख्य कारण: अनहेल्दी डाइट ( unhealthy diet ) , तनाव और कम एक्सरसाइज – भारत में 10-15% युवा महिलाओं प्रभावित है । कोमल की तरह, अगर पीरियड्स 40 दिन लेट हों और वजन बढ़े, तो यह PCOD हो सकता है। अच्छी बात: 90% केस लाइफस्टाइल चेंज से कंट्रोल हो जाते हैं।
  • PCOS का इलाज लाइफस्टाइल + मेडिसिन पर आधारित है। पहले 5-10% वजन कम करें (योगा, व्यायाम और लो-कार्ब डाइट से), फिर मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं इंसुलिन कंट्रोल करें। अंजू ने स्पीर्मिंट टी और होर्मोनल पिल्स से फायदा देखा। 80% महिलाएं मैनेजमेंट से नॉर्मल लाइफ जीती हैं। हमेशा gynaecologist ( स्त्री रोग विशेषज्ञ ) से सलाह लें – सेल्फ-ट्रीटमेंट अर्थात डॉक्टर से बिना सलाह दवाई लेने से बचे से।
  • PCOS को पूरी तरह “क्योर” नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें जेनेटिक (अनुवंशिकता ) एक भूमिका अदा करता है, लेकिन 70% लक्षण लाइफस्टाइल से हमेशा मैनेज हो सकते हैं। अंजू की तरह, रोज 30 मिनट एक्सरसाइज, हाई-फाइबर डाइट (ओट्स, नट्स), और स्ट्रेस मैनेजमेंट (मेडिटेशन) अपनाएं। आयुर्वेदिक हर्ब्स जैसे अश्वगंधा मददगार हैं। याद रखें, शुरुआत जल्दी करी जाये तो डायबिटीज का रिस्क 50% कम हो जाता है।
  • PCOS का फुल फॉर्म Polycystic Ovary Syndrome है, हिंदी में “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” – यह एक हार्मोनल विकार है जो अंडाशय में सिस्ट्स( तरल गाँठे) बनाता है और मेटाबॉलिज्म बिगाड़ता है। कोमल ने अंजू से पूछा था, “PCOS क्या होता है?” जवाब: यह सिर्फ पीरियड्स की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर का विकार है जो डिप्रेशन और हार्ट रिस्क भी लाता है। भारत में 1 in 5 महिलाओं को होता है – इसलिए जागरूकता बढ़ाये।
  • PCOD अंडाश्य -केंद्रित है जो की लाइफस्टाइल से 80% तक कंट्रोल हो जाता है जबकि PCOS पूरे शरीर की है जिसमे जेनेटिक्स भी भूमिका अदा करता है। PCOD कम खतरनाक होता है और इसमें प्रेग्नेंसी आसान है (30% इश्यू), PCOS ज्यादा खतरनाक है इसमें प्रेग्नेंट होनें की संभावना कम होती है।अंजू-कोमल की स्टोरी से सीख: PCOD सही डाइट और एक्सरसाइज से ठीक किया जा सकता है। PCOS मे दवाई के साथ डाइट से।
  • ‎PCOS एक गंभीर बीमारी है जहां उच्च एंड्रोजन हार्मोन अंडाश्य को प्रभावित करते हैं, और अंडाश्य मे तरल भरी गाँठे बन जाती हैं। बचाव: वजन संतुलित रखें, शुगर कम खाएं, और फैमिली हिस्ट्री चेक कराएं। कोमल ने कहा, “यदि जल्दी पता चल जाये तो आसान!” 40% महिलाएं लक्षण इग्नोर करती हैं

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