जानिये टेस्टेस्टरोन के बारे मे सबकुछ

टेस्टेस्टरोन पुरुषो के लिए कितना आवश्यक है इस लेख मे आपको पता चलेगा हमने टेस्टेस्टरोन का सम्पूर्ण विज्ञान इस लेख मे सरल भाषा मे लिखा है। उम्मीद है आपको यह जानकारी लाभदायक होंगी।

1/8/20262 min read

टेस्टेस्टरोन का परिचय

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पौरुष की नींव हैं जिस से पुरुष स्वस्थ जीवन जीता है। यही हार्मोन है जिससे पुरुष के दाढ़ी मूंछ, मर्दाना लक्षण आते है। यह हार्मोन न सिर्फ मर्दों को मर्द बनाए रखने के लिए होता है बल्कि उनकी बाक़ी की स्वास्थ्य आवश्यकता के लिए भी होता है।अगर इस होर्मोन का स्तर आपके शरीर मे सही है तो आप 50 वर्ष की आयु मे भी 25 वर्ष के युवा की तरह चुस्त तंदुरुस्त रहेंगे और अगर यह होर्मोन कम है तो आप 25 वर्ष की आयु मे भी 50 वर्ष के बुजुर्ग की भाति बीमार और कमजोर रहेंगे। ऐसे में इस हार्मोन के विज्ञान को जानना अति आवश्यक हों जाता है। यही हमारे ब्लॉग का लक्ष्य है कि आपको संपूर्ण जानकारी आसान शब्दों में दी जाए।

आइए इसके और भी फायदे देखते है

फायदे

मजबूत हड्डियों,

बेहतर ऊर्जा,

स्फूर्ति

रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity)

बलिष्ठ शरीर (muscular body)

मूड( mood)

और सेक्सुअल हेल्थ (sexual health)

कम शब्दों में कहे तो यह हार्मोन आपको जवान रखने के लिए होता है।

कम होने के नुकसान

• थकान,

• वजन बढ़ना

• यौनेच्छा (सेक्स ड्राइव ) में कमी या

• मूड स्विंग्स महसूस कर रहे हैं – तो हो सकता है आपका टेस्टोस्टेरोन कम हो।

इस ब्लॉग में हम बात करेंगे:

1)
2) यह कैसे आपको मर्द बनाता है
3) घटता टेस्टेस्टरोन बेखबर भारतीय
4) टेस्टेस्टरोन के दुश्मन
कोर्टिसोल
चर्बी
अन्य
5) कम टेस्टेस्टरोन खतरनाक परिणाम
6) टेस्टेस्टरोन के दोस्त
• भोजन (टेस्टेस्टरोन का कच्चा माल)
• कसरत (यह नही तो भूल जाओ मर्दानगी)
• महत्वपूर्ण आदते( टेस्टेस्टरोन बना लिया पर कम मत करो)
7) इसे बढ़ाने के फ्री गाइड
• टेस्टेस्टरोन बढ़ाने के देसी तरीके
•1 महीने मे बढ़ाये टेस्टेस्टरोन इस तरीके से
8) अन्य विषय
9)और एक प्रेरणादायक अंत
चलो शुरू करते हैं।

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टेस्टोस्टेरोन का विज्ञान

1) टेस्टोस्टेरोन का विज्ञान

टेस्टोस्टेरोन क्या है?

टेस्टोस्टेरोन एक स्टेरॉयड हार्मोन (Steroid hormone) है जो मुख्य रूप से पुरुषों के वृषण (testes) में बनता है। महिलाओं में भी थोड़ी मात्रा में अंडाशय (ovaries) और एड्रीनल ग्लैंड (adrenal gland) से बनता है। यह कोलेस्ट्रॉल से बनता है – जी हां, वही कोलेस्ट्रॉल जिसे हम "बुरा" समझते हैं!

कैसे बनता है टेस्टेस्टरोन समझिये 5 स्टेप्स मे

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1 ) हाइपोथैलेमस (Hypothalamus)

→ #2) GnRH छोड़ता है जो कि पीयूष ग्रंथि (pitutary gland) को एक्टिवेट करता है।

#3) पीयूष ग्रंथि (Luteinizing Hormone) छोड़ती है।

#4) LH अंडकोष तक पहुंचता है

#5) अंडकोष मे वृषण टेस्टोस्टेरॉन का निर्माण होता है।

→टेस्टोस्टेरोन

सामान्य स्तर (Normal level)

पुरुष: 300–1000 ng/dL

महिलाएं: 15–70 ng/dL

यह कैसे आपको मर्द बनाता है

मर्दानगी के सारे लक्षण इसी हार्मोन से आते है जैसे दाढ़ी आना, भारी आवाज, गुरुर, तेज़, यौवन आदि। आइये इसके और प्रभावो को थोड़ा और जानते है

बल: स्वस्थ मजबूत आकर्षक मर्दाना शरीर

शरीर मे बल के लिए इसका अहम् योगदान होता है। यह शरीर मे माशपेशी का विकास करता है। जो कि बल के लिए ज़िम्मेवार होती है साथ मे मजबूत हड्डियों के लिए भी उत्तरदायी होता है। जिसके परिणामस्वरूप मनुष्य बलवान होता है।

ऊर्जा, उमंग:

आप जब सुबह सोकर उठते हो और अगर आप मे ताज़गी और उमंग हो ज़िन्दगी जीने का जज़्बा हो, कुछ बड़ा हासिल करने का हौंसला हो तो वह इसके परिणामस्वरुप होता है।

तनाव का दुश्मन :

तनाव कोर्टिसोल होर्मोन के कारण होता है जो कि टेस्टोस्टेरोन होर्मोन के सबसे बड़े दुश्मन मे से एक है। यह दोनों एक दूसरे के ख़तरनाक दुश्मन है जो कि एक दूसरे को घटाते है। यह आपके ऊपर है कि आप या तो कोर्टिसोल होर्मोन को बढाकर टेस्टोस्टेरोन को घटाओं या टेस्टोस्टेरोन को बढाकर कोर्टिसोल को। आपके लिए यह बेहतर होगा कि आप तनाव पैदा करने वाले तत्वों से दूर रहे। आगे के ब्लॉग मे हम आपको इसके बारे मे और बताएँगे कि शरीर मे कोर्टिसोल होर्मोन बढ़ाने वाले कौन से कारण है

टेस्टोस्टेरोन होर्मोन तनाव को कम करता है, तभी आपने बहुतो को कहते सुना होगा कि जब वह जिम करते है तो उन्हें घर पर चैन कि नींद आती है, क्युकी जिम के कारण उनके टेस्टोस्टेरोन मे वृद्धि होती है जो उनके तनाव को काम करता है।

स्वस्थ यौन इच्छा:

स्वस्थ इच्छा मनुष्य के लिए अति अवश्यक होती है। यह आपके स्वस्थ होने का परिणाम होती है सांथ मे आपके वैवाहिक जीवन को भी बेहतर बनाती है जो कि खुशहाल रहने के लिए अति आवश्यक है।

लम्बी आयु:

जब आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे। तो आप लम्बा जीवन ही नहीं जियेंगे अपितु लम्बे समय तक जवान भी रहेंगे,। 40 - 50 कि आयु मे भी आपमें 20-30 कि चुस्ती और तंदुरुस्ती होंगी। यह मनुष्यों मे बीमारी तनाव कम करके उन्हें लम्बा और स्वास्थ्य जीने मे मदद करता है।

चेहरे पर तेज:

स्वस्थ मजबूत और तनावमुक्त होते है तो अपने आप ही आपमें एक आत्माविश्वास होता है जो आपके चेहरे पर साफ झलकता है। यही

एक पुरुष को आकर्षक बनाता है।

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घटता टेस्टेस्टरोन बेखबर भारतीय

3) घटता टेस्टेस्टरोन बेखबर भारतीय

"...भारत में हर 10 में से लगभग 3 पुरुष (28.99%) टेस्टोस्टेरोन की कमी से जूझ रहे हैं।"

(स्रोत: "नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के शोध के अनुसार, [आपका दावा यहाँ]..." में प्रकाशित शोध)

आज के इस समय में टेस्टोस्टेरॉन बहुत ही ज्यादा कम हो गया है। आज के समय हर 10 मे से 3 भारतीय टेस्टेस्टरोन् कि कमी से जूझ रहे है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते है। और सबसे बुरी बात यह है कि ना भारतीय इस बात कि चिंता करते है और ना भारत सरकार। ऐसे मे यह भारतीयों के लिए आवश्यक है कि इसके विज्ञानं और जरूरत को समझें इसको कम करने वाली बुरी आदते अभी छोड़ दे।

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4) टेस्टोस्टेरॉन के दुश्मन

टेस्टोस्टेरॉन के कई दुश्मन है पर हम मुख्य दुश्मनों पर बात करेंगे जो कि इसके बनने मे बाधा डालते है या ख़त्म कर देते है। हम एक एक पर चर्चा करेंगे, उनके वैज्ञानिक कारण, और टेस्टेस्टरोन से उनके सम्बन्ध भी देखेंगे।

1) होर्मोनल

कोर्टिसोल ( तनाव के कारण)
एस्ट्रोजेन (स्त्री होर्मोन)
इंसुलिन
प्रोलैक्टिन
एरोमाटेज (मोटापा)

2) रासायनिक

थैलेट्स
बिसफेनॉल BPA (Bisphenol A)
पैराबेंस

3) बुरी आदते

धूम्रपान
शराब
कम नींद

आइये एक एक करके इनकी टेस्टेस्टरोन से दुश्मनी के कारण समझते है

कोर्टिसोल और टेस्टोस्टेरोन कि दुश्मनी

तनाव कोर्टिसोल होर्मोन के कारण होता है जो कि टेस्टोस्टेरोन होर्मोन के सबसे बड़े दुश्मन मे से एक है। कोर्टिसोल और टेस्टेस्टरोन यह दोनों एक दूसरे के ख़तरनाक दुश्म

न है जो कि एक दूसरे को घटाते है।

जब कोर्टिसोल का स्तर अधिक होता है, तो यह शरीर में टेस्टोस्टेरोन को बनाने वाले रासायन (enzymes) और हार्मोनल मार्गों को दबा देता(suppress) है। सीधे शब्दों मे कहु तो कोर्टिसोल का काम इंसान को विषम परिस्थिति मे ज़िंदा रखना है इसलिए वह शरीर मे प्रजनन वाले कार्यों को रोक देता है और माशपेशी बनाने वाले कार्यों को ना सिर्फ रोकता है बल्कि माशपेशी को तोड़ने भी लगता है। इस कार्य के लिए यह टेस्टेस्टरोन को दबाना पड़ता है।

तनाव को कैसे कम करें

कुछ प्रभावी तरीके जिनसे तनाव को कम करके टेस्टोस्टेरोन बढ़ाया जा सकता है। यह तरीके रिसर्च पर आधारित हैं

1. गहरी और पर्याप्त नींद (Deep Sleep)

नींद तनाव कम करने और टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने का सबसे ताकतवर तरीका है।

जब आप गहरी नींद (REM sleep) में होते हैं, तो कोर्टिसोल का स्तर सबसे कम होता है और टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन अपने चरम (peak) पर होता है।

टिप: रोज़ाना 7-8 घंटे की निर्बाध नींद लें। एक भी रात की कम नींद (5 घंटे से कम) अगले दिन टेस्टोस्टेरोन को 10-15% तक कम कर सकती है।

2. एडाप्टोजेन्स का उपयोग (जैसे अश्वगंधा)

अश्वगंधा एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिस पर काफी वैज्ञानिक रिसर्च हुई है।

रिसर्च: अध्ययनों से पता चला है कि अश्वगंधा का सेवन कोर्टिसोल के स्तर को 20-30% तक कम कर सकता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन में प्राकृतिक रूप से वृद्धि होती है।

एडाप्टोजेन्स का पूरा विज्ञान आपको आगे के सेक्शन मे मिल जायेगा l

टिप: किसी विशेषज्ञ की सलाह पर रात को दूध के साथ अश्वगंधा का सेवन करें।

3. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)

कुछ विटामिन और मिनरल्स सीधे तौर पर तनाव कम करने और टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में मदद करते हैं:

मैग्नीशियम (Magnesium): यह नसों को शांत करता है और नींद की गुणवत्ता सुधारता है। (स्रोत: पालक, कद्दू के बीज, बादाम)।

विटामिन डी (Vitamin D): 'सनशाइन विटामिन' न केवल हड्डियों के लिए बल्कि हार्मोनल संतुलन के लिए भी ज़रूरी है। धूप में बैठना तनाव कम करता है।

जिंक (Zinc): यह टेस्टोस्टेरोन निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण मिनरल है।

4. योग और प्राणायाम

यह मन को संतुलित करता है और तनाव घटाने मे बहुत उपयोगी होता है।

रोज सुबह ताज़ी हवा मे कपलभाती, अनुलोम विलोम आदि करें

जब खाली समय मिले तो ध्यान लगाए

जल्द ही इस पर पूरा ब्लॉग आएगा

5. खान-पान में सुधार (Avoid Sugary Foods)

चीनी से बचें: अधिक चीनी और रिफाइंड कार्ब्स खाने से शरीर में इंसुलिन बढ़ता है, जो कोर्टिसोल को भी बढ़ा सकता है।

6. कसरत और कसरत के बाद रिकवरी (Post-Workout Recovery)

कसरत तनाव को घटाने का बहुत अच्छा तरीका है। आपने सुना या देखा होगा कि बहुत से लोग रोज जिम इसलिए जाते है क्युकी इस से उनका स्ट्तनाव कम होता है और उन्हें अच्छी नींद आती है। जिम के साथ आपको आराम भी चाहिए होता है इसलिए उसे ना भूले।

टिप: हफ़्ते में कम से कम 1-2 दिन 'रेस्ट डे' रखें या हल्की सैर करें। बहुत अधिक ट्रेनिंग (Overtraining) शरीर को तनाव में डाल देती है।

सारांश (Quick Summary)

तनाव घटाने के लिए: गहरी नींद + अश्वगंधा + मैग्नीशियम युक्त आहार + व्यायाम।

यह संयोजन कोर्टिसोल के स्तर को नीचा रखेगा, जिससे आपके शरीर को टेस्टोस्टेरोन बनाने के लिए सही वातावरण मिलेगा।

एस्ट्रोजेन (स्त्री होर्मोन)

एस्ट्रोजन (Estrogen) अपने आप में बुरा नहीं है—यह पुरुषों की हड्डियों की मजबूती और मस्तिष्क के कामकाज के लिए जरूरी होता है।

लेकिन, जब एस्ट्रोजन का स्तर बिगड़ जाता है, तब यह "दुश्मन" की तरह व्यवहार करने लगता है। इसके पीछे के मुख्य कारण ये हैं:

जब एस्ट्रोजन का स्तर बिगड़ जाता है तो निम्नलिखित तरीको से शत्रु कि तरह व्यवहार करता है

1. टेस्टेस्टरोन को दबाना

जब एस्ट्रोजन का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह टेस्टोस्टेरोन के प्रभाव को दबा (Suppress) देता है।

भले ही आपका शरीर टेस्टोस्टेरोन बना रहा हो, लेकिन अगर एस्ट्रोजन ज्यादा है, तो टेस्टोस्टेरोन अपना काम ठीक से नहीं कर पाएगा।

2.टेस्टेस्टरोन को बनने ही नहीं देना

दिमाग को "झूठा" सिग्नल भेजकर

टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन हमारे दिमाग (Pituitary Gland) के सिग्नल से शुरू होता है।

जब शरीर में एस्ट्रोजन बहुत ज्यादा होता है, तो दिमाग को लगता है कि शरीर में पहले से ही बहुत सारे स्टेरॉयड हार्मोन मौजूद हैं।

इसके परिणामस्वरूप, दिमाग अंडकोष (Testes) को LH (Luteinizing Hormone) भेजना कम कर देता है। बिना इस सिग्नल के, शरीर टेस्टोस्टेरोन बनाना धीमा या बंद कर देता है।

3. SHBG (Sex Hormone Binding Globulin) का खेल

एस्ट्रोजन शरीर में एक प्रोटीन की मात्रा बढ़ा देता है जिसे SHBG कहते हैं।

यह प्रोटीन टेस्टोस्टेरोन के साथ चिपक जाता है और उसे "कैद" कर लेता है।

जो टेस्टोस्टेरोन कैद हो जाता है, वह शरीर की मांसपेशियों या ताकत के लिए इस्तेमाल नहीं हो पाता। इसे 'लो फ्री टेस्टोस्टेरोन' कहते हैं।

कौन शरीर मे एस्ट्रोजेन को बढ़ाते है

एरोमाटेज (Aromatase) - असली विलेन

पुरुषों के शरीर में एक एंजाइम होता है जिसे Aromatase कहते हैं। यह एंजाइम आपके कीमती टेस्टोस्टेरोन को एस्ट्रोजन में बदल देता है।

इसका मतलब है कि जितना ज्यादा मोटापा, उतना ज्यादा टेस्टोस्टेरोन एस्ट्रोजन में बदल जाएगा। मोटापे को कम करने के लिए व्यायाम, सही पौष्टिक आहार ले जिसमे कार्बोहाईड्रेट (carbohydrate) कि मात्रा कम हो और अन्य पौष्टीक तत्त्व जैसे प्रोटीन विटामिन आदि उपयुक्त मात्रा मे हो।

Xenoestrogen ( प्लास्टिक)

प्लास्टिक शरीर मे एक रसायन छोडता है जिसको xenoestrogen कहते हाई जो कि बिल्कुल एस्ट्रोजन कि तरह कार्य करता है। प्लास्टिक कितना ख़तरनाक होता है यह आप आगे देखेंगे।

एस्ट्रोजन बढ़ने से क्या नुकसान होते है

Gynecomastia: छाती के आसपास चर्बी जमना (Man boobs)। इसमें पुरुषो कि छाती बिल्कुल महिला जैसे हो जाती है जो उनके लिए बहुत शर्मनाक होती है

Erectile Dysfunction: यौन इच्छा और क्षमता में कमी। इसमें लिंग सख्त ही नहीं हो पाता

भावनात्मक बदलाव: बहुत ज्यादा भावुक होना या अवसाद महसूस करना। छोटी बातो मे डिप्रेशन मे आजाना। तनाव भरा जीवन लगना।

मांसपेशियों का नुकसान: जिम जाने के बाद भी मसल्स न बनना।

शरीर मे चर्बी जमा होना जो कि आपके शरीर को अनाकर्षक दिखाता है।

प्रोलैक्टिन होर्मोन (prolactin hormone)

प्रोलैक्टिन Pituitary gland से निकलने वाला हार्मोन है।

महिलाओं में यह दूध बनाने के लिए ज़रूरी है,

लेकिन पुरुषों में इसकी भूमिका सीमित और संतुलन वाली है।

प्रोलैक्टिन दिमाग के उस सिस्टम को दबा देता है, जो कि टेस्टेस्टरोन बनाने के लिए ज़िम्मेवार होता है। जिस के कारण टेस्टेस्टरोन के उत्पादन मे कमी आ जाती है।

कुछ रसायन जो गलत आदतो के कारण शरीरमे प्रवेश कर जाते है और टेस्टेस्टरोन के लिए हानिकारक होते है

जो टेस्टोस्टेरोन बनाने का सिग्नल देता है

1) प्लास्टिक टेस्टेस्टरोन के ख़तरनाक दुश्मन मे से एक

आज के समय में भारतीयों को इतनी बुरी आदत लग गई है कि वह हर चीज में प्लास्टिक का उपयोग करते है। चायछनी प्लास्टिक की, कप प्लास्टिक का जिसमें गरम चाय, टिफिन प्लास्टिक का। ऐसे में प्लास्टिक के कण भारतीयों के शरीर अंदर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में इसके हानिकारक प्रभाव दिख रहे हैं। ऐसे मे हम देखते है कि यह किस तरह के रसायन शरीर मे पहुँचाता है और उनके क्या दुष्प्रभाव होते है

Xenoestrogen (ज़ेनोएस्ट्रोजेन)

प्लास्टिक मे हानिकारक रसायन Xenoestrogen पाया जाता है जो कि बिल्कुल एस्ट्रोजेन के जैसे काम करता है। और वह सारे नुकसान पहुँचाता है जो कि एस्ट्रोजेन पहुँचाता है।

(BPA, Phthalates) → एस्ट्रोजन जैसे प्रभाव

बीपीए (BPA - Bisphenol A)

BPA प्लास्टिक बोतलों, कैन लाइनिंग और रसीद पेपर में मिलता है। यह एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को सक्रिय कर टेस्टोस्टेरोन संश्लेषण (synthesis) को दबाता है। साथ मे टेस्टोस्टेरोन बनाने वाली कोशिकाओं और टेस्टिकुलर इम्यून सेल्स को बिगाडता है जिस से प्रजनन क्षमता भी घटती है।

वैज्ञानिक प्रमाण: BPA के संपर्क में आए पुरुषों में फ्री टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया गया।48828b चूहों पर अध्ययन में BPA ने प्लाज्मा टेस्टोस्टेरोन को घटाया और LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) को बढ़ाया।163cac एक अन्य शोध में BPA ने चूहों के वृषण में टेस्टोस्टेरोन को काफी कम कर दिया।023f9d यह टेस्टिकुलर इम्यून डिसफंक्शन के माध्यम से पुरुष बांझपन का कारण बनता है।

Phthalates (फथालेट्स)

थैलेट्स प्लास्टिक, सौंदर्य प्रसाधनों (beauty products) और पैकेजिंग में पाए जाते हैं। ये लेयडिग सेल्स (Leydig cells) को नुकसान पहुंचाते हैं, जो वृषण (testicles) में टेस्टोस्टेरोन का मुख्य उत्पादक होते हैं। इससे टेस्टोस्टेरोन का स्राव कम हो जाता है और INS L3 (एक अन्य हार्मोन) भी प्रभावित होता है। इसके अलावा, ये सेर्तोली सेल्स (Sertoli cells) को बाधित कर स्पर्म उत्पादन को रोकते हैं।

वैज्ञानिक प्रमाण: एक अध्ययन में पाया गया कि थैलेट्स के संपर्क में आने से पुरुषों और महिलाओं दोनों में सर्कुलेटिंग टेस्टोस्टेरोन का स्तर काफी कम हो जाता है।f8696a अमेरिकी वयस्कों पर एक अन्य शोध में थैलेट्स ने टेस्टोस्टेरोन को कम कर मोटापे का जोखिम बढ़ाया।b4e8ad चूहों पर अध्ययन में थैलेट्स ने लेयडिग सेल्स को क्षतिग्रस्त कर टेस्टोस्टेरोन उत्पादन घटाया।

है।

बचने के लिए क्या करें?

1) टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाए रखने के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करना एक अच्छा कदम है:

2) प्लास्टिक की बोतलें और कंटेनर: गर्म खाने या पीने की चीज़ों को प्लास्टिक के कंटेनर या बोतलों में रखने से बचें। गर्मी से ये रसायन ज़्यादा मात्रा में खाने या पीने में मिल सकते हैं।

3) बीपीए-मुक्त (BPA-Free) उत्पाद:

ऐसे उत्पाद चुनें जिन पर "BPA-Free" लिखा हो, हालांकि उनमें अन्य हानिकारक रसायन हो सकते हैं।

4) कांच या स्टील का उपयोग:

पानी पीने और खाना स्टोर करने के लिए कांच (Glass) या स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) के बर्तनों का अधिक उपयोग करें।

5) प्लास्टिक मे खाना खाना या खरीदना बिल्कुल बंद

चाहे कुछ भी हो प्लास्टिक मे गरम खाना खाना या पैक करना बिल्कुल बंद करदे क्युकी सुरक्षा ही इलाज है

अन्य कारण

2) प्रोसेस्ड फूड → शुगर, ट्रांस फैट, ना बाबा ना

जहां भारतीय पहले घी लस्सी छाछ, मट्ठा, नारियल पानी, फल घी का चूरमा आदि का सेवन बचपन में ही करते थे, वही भारतीय बच्चे पैकेट में आई हुई चीजों का सेवन करते है और उनके साथ बड़े भी इसे पीछे नहीं हटते है। यह स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक आदतों में से एक है , और बीमारियों को निमंत्रण देता है।

आइये देखते है कि यह पैकेट बंद खाना आपके टेस्टेस्टरोन के लिए जहर है।

. सूजन (Inflammation) को बढ़ाना

कैसे काम करता है: Trans Fat (जो अक्सर बेकरी उत्पादों, तले हुए स्नैक्स और पैकेटबंद फूड में पाए जाते हैं) शरीर में क्रोनिक सूजन (Chronic Inflammation) पैदा करते हैं।

जब आपके शरीर मे चोट लगती है तो सूजन आ जाती है उसे इंफ्लमैशन (inflammation) कहते है। जब यह सूजन थोड़े समय के लिए होती है तो इसे अक्यूट इंफ्लमैशन (acute inflammation) कहते है पर यही सूजन लम्बे समय तक हो तो इसे क्रोनिक इंफ्लमैशन (chronic inflammation) कहते है।

Testesteron -लेवल पर प्रभाव: क्रोनिक इंफ्लमैशन आपके शरीर मे तनाव रखती है और कोर्टिसोल (Cortisol) (तनाव हार्मोन) का उत्पादन बढ़ाती है। कोर्टिसोल और टेस्टोस्टेरोन एक-दूसरे के उल्टा काम करते हैं—जब कोर्टिसोल बढ़ता है, तो टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन गिर जाता है।

2. वसा (Fat) का बढ़ना और एस्ट्रोजन में बदलना

प्रोसेस्ड और ट्रांस फैट वाले फूड कैलोरी में बहुत अधिक होते हैं, जिससे शरीर में वसा (Body Fat), खासकर पेट के आसपास की चर्बी (Visceral Fat) तेज़ी से बढ़ती है।

वसा कोशिकाएँ (Fat Cells) एक एंजाइम (Aromatase) का उत्पादन करती हैं। यह एंजाइम आपके शरीर में मौजूद टेस्टोस्टेरोन को पकड़कर एस्ट्रोजन (Estrogen - महिला हार्मोन) में बदल देता है। जितनी अधिक चर्बी, उतना अधिक एस्ट्रोजन, और उतना ही कम T-स्तर!

3. कोलेस्ट्रॉल और फैटी एसिड संतुलन को बिगाड़ना

टेस्टोस्टेरोन का निर्माण कोलेस्ट्रॉल से होता है। आपके टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन के लिए शरीर को स्वस्थ और प्राकृतिक वसा (Healthy Fats) की आवश्यकता होती है (जैसे मोनोअनसैचुरेटेड(monosaturated) और सैचुरेटेड फैट(saturated fat)। Trans Fat और अस्वस्थ तेल कोशिका झिल्ली (Cell Membranes) को कठोर बनाते हैं।

T-लेवल पर प्रभाव: ट्रांस फैट एलडीएल LDL ('खराब' कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाते हैं और एचडीएल ('अच्छा' कोलेस्ट्रॉल) को कम करते हैं। यह हार्मोन बनाने के लिए आवश्यक स्वस्थ वसा के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे T-उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

4. एंडोक्राइन डिसरप्टर्स और प्लास्टिक (Endocrine Disruptors)

कैसे काम करता है: पैकेट बंद फूड अक्सर प्लास्टिक पैकेजिंग में आते हैं, जिनमें BPA (Bisphenol A) और Phthalates जैसे रसायन होते हैं। जिसका दुष्प्रभाव हम ऊपर देख चुके है।

ट्रांस फैट केवल आपके दिल के लिए नहीं, बल्कि आपकी मर्दानगी की फैक्ट्री (T-उत्पादन) के लिए भी दुश्मन है। वे शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, T-को एस्ट्रोजन में बदलने की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं, और हार्मोन उत्पादन के लिए ज़रूरी कच्चे माल (स्वस्थ वसा) को नष्ट कर देते हैं। अपनी डाइट से ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड स्नैक्स को हटाना टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

इन पैकेट फूड में ट्रांस फैट, शुगर और भी कई सारे हानिकारक तत्वों का प्रयोग होता है।

3) विटामिन D की कमी → 70% भारतीयों में

विटामिन डी की कमी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर को कम कर सकती है। जब शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, तो टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन भी कम हो जाता है, जिससे ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी, और सेक्स ड्राइव में गिरावट आ सकती है।विटामिन डी टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन में टेस्टिकल्स (अंडकोष) की भूमिका निभाता है। यह टेस्टिकल्स में टेस्टोस्टेरोन बनाने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करता है। विटामिन डी की कमी से ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) का प्रभाव कमजोर हो जाता है जिससे टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर जाता है। साथ ही, शरीर में पारा-थायरॉयड हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है जो टेस्टिकल्स के सही कामकाज में बाधा डालता है।

4) नींद की कमी

आज के समय में भारतीय अपनी नींद पर ध्यान देना भूल चुके है। जिसका कारण काम की चिंता, पढ़ाई आदि है। परन्तु मोबाइल का उपयोग भी इसमें कम नहीं है, जब भारतीय बिस्तर पर लेट कर आराम करने का मौका मिलते है, तो वह तुरंत मोबाइल चालू कर लेते है। यही उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है।

गहरी नींद मे ही शरीर टेस्टेस्टरोन का निर्माण होता है।

नींद की कमी से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है जो कि टेस्टोस्टेरॉन को खूब दबाता है और

5) तनाव

तनाव शरीर में कई बीमारियों को निमंत्रण देता है। तनाव के कारण कार्टिसोल का स्तर बढ़ता है जो कि तनाव का हार्मोन है, यह कार्टिसोल टेस्टोस्टेरॉन के स्तर पर बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है।

Stress me ek vyakti ki photo aur testesteron sad

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6) मोटापा

मोटापा → फैट सेल्स (fat cells) टेस्टोस्टेरॉन को एस्ट्रोजन में बदलती हैं

शरीर में जमी चर्बी टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन को एस्ट्रोजन (estrogen) हार्मोन में बदल देती है। एस्ट्रोजन हार्मोन स्त्री शरीर का हार्मोन है जो कि उनके शरीर में मुख्य भूमिका निभाता है जैसे स्तन का विकास , पतली आवाज, आदि जितने भी स्त्री शरीर के मुख्य लक्षण है वह पुरुष में आ जाते है । कुल मिलाकर कहे तो पुरुषों में जनानापन इसी के कारण होता है।

7) धूम्रपान: फायदा या नुकसान

कई बड़े अध्ययनों में पाया गया कि सिगरेट पीने वाले पुरुषों के खून में टेस्टोस्टेरोन का स्तर न पीने वालों से थोड़ा ज़्यादा होता है। इसका कारण यह हो सकता है कि तंबाकू में मौजूद एक रसायन (कोटिनीन) शरीर में टेस्टोस्टेरोन के टूटने की प्रक्रिया को कुछ हद तक रोक देता है।

Before. After.

लेकिन

• वैज्ञानिकों ने पाया है कि निकोटीन और सिगरेट का धुआं दिमाग और अंडकोष के बीच चलने वाले हार्मोन सिस्टम (हाइपोथैलेमस–पिट्यूटरी–गोनैडल ऐक्सिस) को गड़बड़ा देता है।

जानवरों और इंसानों पर हुई रिसर्च में दिखा कि निकोटीन से टेस्टोस्टेरोन और LH कम हो सकते हैं, जबकि कुछ और हार्मोन (जैसे प्रोलैक्टिन) बढ़ सकते हैं, जिससे पुरुष प्रजनन क्षमता और यौन कार्य दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

• धूम्रपान से शरीर में “ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस” बढ़ता है, यानी जहरीले रिएक्टिव ऑक्सीजन (ROS) ज़्यादा बनते हैं, जो सीधे अंडकोष की कोशिकाओं और शुक्राणु पर हमला करते हैं। इससे टेस्टिस की बनावट बिगड़ सकती है और टेस्टोस्टेरोन बनाने वाली कोशिकाएँ भी कमजोर हो सकती हैं।

शराब

शराब टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन पर तीन तरह से वार करता है (तिहरा खतरा)।

1) अंडकोष पर प्रभाव: शराब लेडिग कोशिकाओं (Leydig cells) के लिए जहरीली होती है, जो अंडकोष में टेस्टोस्टेरोन बनाती हैं।

2) एस्ट्रोजन में बदलाव: शराब शरीर में 'एरोमाटेज' (Aromatase) को बढाती है।

3)मस्तिष्क का सिग्नल रुकना: यह मस्तिष्क (Hypothalamus) से निकलने वाले उन हार्मोन्स को रोक देती है जो अंडकोष को टेस्टोस्टेरोन बनाने का आदेश देते हैं।

. धूम्रपान (Smoking): ऑक्सीजन और रक्त प्रवाह की कमी

धूम्रपान केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि आपके हार्मोनल संतुलन को भी बिगाड़ता है:

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस: सिगरेट के धुएं में मौजूद टॉक्सिन्स शरीर में 'फ्री रेडिकल्स' बढ़ाते हैं, जिससे टेस्टोस्टेरोन बनाने वाली कोशिकाएं डैमेज हो जाती हैं।

रक्त प्रवाह (Blood Flow): निकोटीन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है। टेस्टोस्टेरोन के सही संचार और प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर रक्त प्रवाह जरूरी है, जो धूम्रपान के कारण बाधित होता है।

3. कम नींद (Sleep Deprivation): सबसे बड़ा दुश्मन

टेस्टोस्टेरोन का अधिकांश हिस्सा गहरी नींद (REM Sleep) के दौरान बनता है।

कोर्टिसोल का बढ़ना: जब आप कम सोते हैं, तो शरीर में 'कोर्टिसोल' (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़

जाता है।

कोर्टिसोल और टेस्टोस्टेरोन एक-दूसरे के विपरीत काम करते हैं—जैसे ही कोर्टिसोल बढ़ता है, टेस्टोस्टेरोन नीचे गिर जाता है।

रिकवरी का न होना: एक अध्ययन के अनुसार, सिर्फ एक हफ्ते तक 5 घंटे से कम सोने पर टेस्टोस्टेरोन के स्तर में 10% से 15% तक की गिरावट आ सकती है।

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